Shishu Ki Malish Karne Ka Tarika: जन्म के बाद शिशु की मालिश करना एक पुरानी परंपरा है। जन्म के कम से कम एक महीने बाद हर डॉक्टर नवजात शिशु की मालिश करने की सलाह देता है। दरअसल, बेबी मसाज बहुत जरूरी है, क्योंकि मसाज यानि मालिश से ही शिशु की त्वचा को सही पोषण मिलता है। इसके अलावा यह उसके शारीरिक, मानसिक विकास और तंदरूस्ती के लिए बहुत आवश्यक है। इतना ही नहीं इससे बच्चों को नींद अच्छी आती है और वह हरदम एक्टिव भी रहते हैं। लेकिन कई मांओं को शिशु की मालिश को लेकर असमंजस रहता है, क्योंकि उन्हें बेबी की मालिश करने का सही तरीका नहीं पता होता। यदि आप भी पहली बार मां बनी हैं और आप खुद अपने शिशु की मालिश करना चाहती हैं, लेकिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, तो हमारा ये आर्टिकल आपके लिए बहुत उपयोगी है।
इसमें हम आपको शिशु की मालिश करने के तरीके और स्टेप बताएंगे। साथ ही आपके शिशु की मालिश से जुड़ी अन्य जानकारी भी देंगे।
शिशु की मालिश क्या है – What is baby massage in Hindi
नवजात शिशु की मालिश करना कब शुरू करें – When to start baby massage in Hindi
शिशु की मालिश जन्म के एक महीने बाद से शुरू करनी चाहिए। इसका कारण यह है, कि शिशु की त्वचा जन्म के दौरान ठीक से विकसित नहीं हो पाती और त्वचा को पानी प्रतिरोधी होने में कम से कम 15 दिन का समय लगता है। इसके अलावा गर्भनाल का घाव भी अभी ताजा होता है, इसलिए जन्म के तुंरत बाद शिशु की मालिश न करें। आप चाहें, तो जन्म के 15 दिन में भी मालिश शुरू कर सकती हैं। अगर बच्चा पूरे 9 महीने में पैदा हुआ है, तो और उसका वजन ढाई किलो से ज्यादा है तो भी।
अगर आप अपने बेबी को ग्रुप मसाज सेशन्स में ले जाने की योजना बना रही हैं, तो जब तक वह छह सप्ताह का न हो जाए, इंतजार करें। क्योंकि बहुत छोटे बच्चे भीड़ भरे माहौल में तनावग्रस्त हो जाते हैं। कुल मिलाकर एक महीना आदर्श समय है, क्योंकि इसके कई लाभ हैं। इस समय तक शिशु की नाभि सूख जाती है, स्किन बैरियर मजबूत होता है और इस उम्र में बच्चा स्पर्श के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
शिशु की मालिश कैसे की जाती है – Navjat shishu ki malish kaise ki jati hai in Hindi
नवजात शिशु की मालिश कैसे करें – Navjat shishu ki malish kaise kare in Hindi
शिशु की मालिश के लिए तैयारी – Setup For Baby Massage in Hindi
- बसे पहले फर्श पर या बेड पर अपने साथ तौलिया लेकर बैठें। अगर आप खड़े होकर मालिश कर रही हैं, तो अपने सामने की टेबल पर तौलिया रखें। तौलिया अतिरिक्त तेल को अवशोषित करने में मदद करती है।
- कमरे का तापमान बच्चे के लिए आरामदायक बनाएं। सर्दियों के दौरान ध्यान रखें, कि कमरा गर्म हो और गर्मी के दौरान सुनिश्चित करें, कि कमरे में ठंडी और ताजी हवा आती रहे, क्योंकि शिशुओं को जल्दी गर्मी लगती है, इससे वह चिड़चिड़े भी हो सकते हैं।
- मालिश करने से पहले कमरे में प्राकृतिक रोशनी आना बहुत जरूरी है। जितना संभव हो, प्राकृतिक रोशनी का ही प्रयोग करें।
- मालिश के लिए ऐसा तेल चुनें, तो खासतौर से शिशुओं के लिए ही बनाया गया हो। बिना सुंगध वाले तेल का उपयोग करना अच्छा है।
- अब आप बच्चे के कपड़े उतारें और आप चाहें तो नैपी में या बिना नैपी में मसाज करने का विकल्प चुन सकती हैं। पेट की मालिश करते समय नैपी को थोड़ा ढीला छोड़ दें।
1. मालिश के लिए शिशु को तैयार करें
2. शिशु के पैरों की मालिश करें
अब आप अपने दोनों हाथों से जांघों को धीरे से सहलाते हुए पैर की मालिश खत्म करें। धीरे-धीरे दिल से लेकर पैर तक हल्के हाथ से मालिश करें, जैसे कि आप तौलिया से उसका बदल पोंछ रही हों।
(और पढ़े – पैरों की देखभाल के लिए अपनाएं कुछ आसान टिप्स…)
3. शिशु की बाहों की मालिश करना
पैरों की मसाज करने के बाद तीसरे स्टेप में शिशु के बाहों की मसाज की जानी चाहिए। बाहों की मालिश करने का पैटर्न पूरी तरह से पैरों के जैसा ही है। पहले बच्चे के हाथ को पकड़ें और हथेलियों पर गोलाकार घुमाएँ (स्ट्रोक करें)। धीरे -धीरे बच्चे की उंगलियों पर स्ट्रोक करें।
उसके हाथ को चारों ओर घुमाते हुए धीरे से कलाई की ओर स्ट्रोक के साथ हाथ के पीछे वाले हिस्से की मसाज करें। फिर धीरे-धीरे उसकी कलाई की सकुर्लर मोशन में मालिश करें।
अपने स्ट्रोक को धीरे-धीरे अग्र-भुजाओं (Forearms) की तरफ ले जाएं और फिर अपर आर्म की तरफ ले जाएं। सकुर्लर मोशन में शिशु के पूरे हाथ की कोमलता के साथ मसाज करें।
4. शिशु की छाती और कंधे की मालिश करना
5. शिशु के पेट की मसाज करना
बच्चे की मसाज के पांचवे स्टेप में आपको शिशु के पेट की मसाज करनी होती है। यह एक नाजुक हिस्सा है, इसलिए यहां कम दबाव दें। पेट की नाभि के ऊपर से और चेस्ट बोन के नीचे से मालिश करना शुरू करें। अपनी हथेली को चेस्ट बोन के नीचे रखें और नाभि के चारों ओर सकुर्लर मोशन में मसाज करें। नवजात शिशुओं में नाभि नाजुक व संवेदनशील होती है, इसलिए यहां मालिश जरा ध्यान से करें।
6. शिशु के चेहरे और सिर की मालिश
पेट की मसाज के बाद अब बारी आती है शिशु के चेहरे और सिर की मालिश करने की। शिशु की मालिश करने के छठवें स्टेप में आप चेहरे और सिर की मसाज करना शुरू करें। शिशु के चेहरे और सिर की मसाज करना थोड़ा चैलेंजिंग होता है, क्योंकि इस दौरान बच्चे बहुत हलते-डुलते हैं। लेकिन यह उतना ही जरूरी है, जितना कि शरीर के अन्य हिस्सों की मालिश करना। अपनी तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) को शिशु के माथे के मध्य में रखें और धीरे-धीरे ठुड्डी की ओर उसकी चेहरे की मसाज करें। ठोड़ी से अपनी उंगली को उसके गालों की ओर ले जाएं और एक सकुर्लर मोशन में उसके गालों की धीरे से मालिश करें।
चेहरे की मालिश करने के बाद स्कैल्प पर उंगलियों से मालिश करना शुरू करें। ठीक उसी तरह जैसे आप अपने बच्चे के बालों में शैंपू करती हैं।
अब अपनी उंगलियों की मदद से शिशु के माथे की मालिश हल्के हाथों से करें।
(और पढ़े – सिर की मालिश (हेड मसाज) कैसे करें तेल और फायदे…)
7. शिशु के बैक की मालिश करें
आखिरी यानि शिशु की मालिश के सांतवे स्टेप में आपको बच्चे की पीठ की मालिश करनी है। अपने बच्चे को उसके पेट के बल लिटाएं। अब अपनी उंगलियों को बच्चे की पीठ पर रखें और क्लॉस वाइस ट्रेस करते हुए उसके बटक्स (हिप्स) की ओर ले जाएं।









0 टिप्पणियाँ